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Saturday, December 1, 2018

Do You Know

वाहनो के लिए 20 साल चलने वाली बैट्री

वैज्ञानिकों द्वारा नए किस्म की 20 वर्ष चलने वाली बैटरी विकसित की है, जिसे चार्ज करने में दो मिनट लगेगे यह जानकारी इस परियोजना पर लगे सिंगापुर के नान्यांग पौघोगिकी विश्वविद्दालय के वैज्ञानिको ने दी। उन्होने बताया कि इस नई बैट्री का उपयोग विभिन्न क्षेत्रें में किया जा सकता है, लेकिन यह विशेष रुप से इलेक्टिक यातायात बाहनो के लिए अत्यंत उपयोगी होगी। वर्तमान में यातायात वाहनो में लगी बैट्री अत्यंत कम समय चलती है औऱ उनको रिचार्ज करने की अवधि बहुत लब्मी होती है। प्रोफेसर चेन झिआओगोन्हॉग ने बताया कि बहुत व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली लीथियम आयन बैट्री की तुलना में इस नई बैट्री का जीवन बहुत लंबा यानी 20 वर्ष है, और वर्तमान में मौजूद बैट्री से 10 गुना ज्यादा है। सिंगा पुर विश्वविद्दालय के प्रतिनिधि का अनुमान है कि दो वर्षो क दौरान यह नई बैट्री पैमाने पर बाजार में आ जाएगी।



              खास आवाज से शिकार चुराते है चमगादड़

चमगादड
चमगादड की फोटो

चमगादडो की एक प्रजाति अपने प्रतिद्धिंदी चमगादड़ से उसका शिकार चुराने के लिए अलग तरह की ध्वनि निकालती है। चमगादड़ अपने शिकारर को जैसे ही लपकने वाली होता है कि तभी एक ध्वनि उसे रास्ते से भटका देती है और उसका निशाना चूक जाता है। प्रतियोगी चमगाद़ड़ जो ध्वनि निकालता है उससे वह शिकार को अपने नियंत्रण में लेने को कामयाब हो जाता है विज्ञान पत्रिका में छपी वैज्ञानिकों की टीम की रिपोर्ट के अनुसार मैक्सिकन का बिना पूछ वाले चमगादड़ का ऐसा व्यवहार पहली बारर देखने में आया है, इकोलोकेशन प्रक्रिया चमगादडो की आवाज सुनने के लिए अल्ट्रावॅयलेट लाइट टावर औऱ माइक्रोफोन लगाए गए, आमतौर पर चमगादड अंधेरे में शिकार को खोजने औऱ फिर उस तक पहुचने के लिए मुंह से तेज गति की ध्वनि तरंगे निकालता है। इसे  ‘एकालोकेशन’ प्रक्रिया कहते है। जैसे शिकार नजदीक आता जाता है ये तरंगे तेज हो जाती है. आमतौर पर अंधेरे में शिकार करने या एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए चमगादड इन मुंह से ये आवाजें निकालते है।


पक्षियों को नहीं होते कान

 
विभिन्न कोणो से आ रही आवाजों को सुनने के लिए पक्षी अपने सिर का इस्तेमाल करते है, क्योकि स्तनधारियों की तरह पक्षियों की बाहरी कान नहीं होते। एक नए अद्दययन में यह बात सामने आई है, अद्दययन के मुताबिक, पक्षियो को बाहरी कान नहीं होते है, लेकिन इसका काम वह अफने सिर से लेते है। इस माध्यम से ही वह पता लगा लेते है कि आवाज उनके ऊपर से आ रही है या नीचे से या कहीं और से। जर्मनी यूनिवर्सिटी मुंचेन के मूख्य अध्ययनकर्ता हैंस ए स्नाइडर ने कहा, पहले माना जाता था कि चूकिं पक्षियों के बाहरी कान नही होते, इसलिए वे विभिन्न उंचाइयों से आ रही आवाजों में फर्क नहीं कर पाते। उन्होने कहा लेकिन एक मादा श्यामपक्षी यह पता लगाने में सक्षम पाई गई कि उसका साक्षी नर पक्षी उससे थोडी ऊंचाई पर ऊपर स्थित है। स्नाइडर ने कहा,दरअसल, उनका अंडाकार सिर ध्वनि ऊर्जा को ठीक उसी तरह रूपांतिरत करता है, जिस तरह बाहरी कान करता है। यह निष्कर्ष पत्रिका ‘पीएलओएस वन’ में प्रकाशित हुआ है।


उदाहरण देकर पढाएगा कंप्यूटर

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी के शोधाकर्ता ने एक ऐसी प्रणाली का इजाद किया है जो असंगठित आंकडों से अनुकूल चीजें हासिल करने की कंप्यूटर की क्षमता बढ़ा सकता है औऱऱ मनुष्यो की निर्णय क्षमता करेगी, ताकि कंप्यूटर और मनुष्य मिलकर बेहतर निर्णय लेने में एक दूसरे का सहयोग कर सकें। एमआटी में वैमानिकी और अंतरक्षियानिकी की सहायक प्राध्यापक और इस शोधा की सह लेखक जूली शाह ने कहा, इस काम में हम देख रहे थे कि क्या हम मशीन से सीखने की तकनीकी को बढाया दे सकते है ताकि यह लोगो को ठीक निर्णय लेने की पहचान दे सके। प्रयोगो में नई प्रणाली का उफयोग करने वाले मानव प्रतिभागी, वर्गीकरण कार्यो में मौजूदा एल्गोरिथम के आधार पर एक समान प्रणाली का उपयोग करने वालो की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक बेहतर थे। एमआईटी शोधाकर्ताओं ने एल्गोरिथम के प्रकार में दो प्रमुख संशोधन किये है आमतौर पर जिनका प्रयोग सीखने में किया जाता है, जिसमे साधारणत कंप्यूटर असंगठित आंकडो में अनुकूलताएं ढूंढता है। निष्कषो को अघले सप्ताह माॅन्टियल में होने वाले तंत्रिका सूचना प्रोसेसिंग सोसायटी के सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाता है
 
 


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